Wednesday, December 2, 2009

तुम कहा हो चाँद

काफी वक्त गुजर गया उन्हें गए हुए। बड़ा अजीब है ना वक्त गुजरता जाता है और हम प्यार के बिना जीना सीख लेते है। ना जाने हम उनसे ही इतना क्यूँ डरते है जिन्हें सबसे ज्यादा प्यार करने की दुहाई देते है। अब तो एक मुद्दत हो गई उन्हें देखे हुए। वो हसीं चेहरा आज भी मेरे आंखों में ताजा गुलाब की तासीर की तरह ताजा है। पता नही क्यूँ उसकी बेरुखी पर गुस्सा आता है। जबकि जनता हु की उसकी भी कई मजबुरिया थी। पर ये दिल समझाने से नही समझता। वो जिन्दगी की हकीक़त का सामना करने से कतरा गई पर ख़ुद को मेरे दिल से ना निकाल पाई। मुझे अब भी उसके हाथो का बना खाना खाने का दिल करता है। आज उसके हाथो का एक निवाला तक चखने को तरस जाता हु। पता नही उसे खाने की मेज पर मेरी याद आती भी होगी या नही। हर वक्त मेरे पिने को लेकर फिकरमंद रहती थी पर आज एसा कोई भी नही जो मेरा हाल समझ सके

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