Sunday, September 20, 2009
20 सितम्बर 2009
प्यार और इश्क दोनों एक ही नाम है या अलग अलग मुझे पता नही। पर इतना तो समझ ही चुका हु की इस दुनिया में लोग जिसे सच्चा प्यार कहते है वो सायद हर किसी को नही मिलता। दिल को खेलने की चीज बना दिया है हुस्न वालो ने। और कहती है की हम ही वफ़ा नही करते। आखिर गलती क्या की थी मैंने जो वो इस तरह मुझे छोड़ कर चली गई। कितने हसी पल थे वो जो हमने साथ साथ बिताये थे। पता है दोस्तों अभी १४ सितम्बर को ही उसका बर्थडे था पर उसने मेरे मेल का कोई जवाब ही नही दिया। क्या कोई इतना भी संग दिल हो जाता है अपने हमदम से। मुझे याद है जब उसने कहा था की वो एक ऐसी है जो मेरी परवाह करती है मेरी केयर करती है। पर अब लगता है की दुनिया में ये दिल अकेला रह गया है। पर फिर भी जाने क्यूँ दिल से दुआ ही निकलती है उसके लिए। जनता हु की बहुत जल्द चाँद की सादी भी हो जायगी और वो परायी कहलाने लगेगी। और मैं कुछ भी नही कर पा रहा क्युकी डरता हु कही वो और ना खफा हो जाए। मेरे यारो दुआ करो की मेरे चाँद को मेरी भी उमर लग जाए।
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